Tuesday, August 11, 2009

बोतल

बोतल तो आदमी का, जन्म से ना छोड़े पीछा,
बोतल का दूध पीके, शिशु मुस्कुराएगा,
कोका कोला, पैप्सी को, जवानी में पीते रहों,
बुढापे में ग्लूकोज, खून चढवाएगा,
सच-झूठ बोल-बोल, जीवन में विष घोल,
हरे-हरे नोटो से, तू घर को सजाएगा,
साल भर देर रात, सातों दिन काम करों,
धन मिल जाए, तन-मन मर जाएगा । ।

मौसम खुशगवार हो या हो फिर गमगीन,
जन्म मरण के बीच तक सब बोतल आधीन,
पहली बोतल जन्म सaमय ही शिशु भाग्य में आती,
शिशु स्तनपान से माता जाने क्यूं घबराती,
जबकि मां का दूध ही केवल पौष्टिकता है लाता,
हष्ट – पुष्ट बनता है शिशु कब समझेगी माता,
दूसरी बोतल बिसलेरी की, दूध से महंगा पानी,
प्याऊ, सुराही या फिर मटका लगती एक कहानी,

खेलकूद की उम्र में देखो, बचपन आज तरसता,
पानी की बोतल और संग में खुद से भारी बस्ता,
बन्द करो अब हिन्दवासियों खुद पर अत्याचार,
जंक – फूड से सेहत का हम करते बंटाधार,
दूध, दही फिर से अपनाएं छोड़े काफी चाय,
तीसरी बोतल कोल्ड ड्रिंक को कर दें बाय-बाय,
चौथी बोतल करे ग्रहण, जीवन में ग्रहण लगाएं,
बीयर पीऐ दुनिया को, जौं का पानी बतलाएं,

पाँचवी बोतल झगड़ो की जड़, कहते जिसकों व्हिस्की,
फेफड़े सारे गल जाते है लाइफ होती रिस्की,
जो इन पांच बोतलों को जीवन में अपनाता,
छठवी बोतल बुढापे में ग्लूकोज चढवाता,
अंत समय में बोतल फिर तो हस्पताल पहुंचाती,
सातवी खून की बोतल चढती प्रभु की याद दिलाती,
कहे रसिक रत्नेश की देह जब प्राण छोड़कर जाती,
आंठवी बोतल गंगाजल से ही मुक्ति मिल पाती,

एक – एक करके बोतल के तुम जलवे गिन लो आठ,
देख बोतल के ठाठ भैया, देख बोतल के ठाठ,
प्रण करें कि आज से हम बोतल का नाम ना लेगें,
आने वाली पीढी को एक नयी दिशा हम देगें,
बोतल मानव की दुश्मन है, इसको दूर भगाओ,
गौरवशाली, भारतवाली, संस्कृति अपनाओ ॥

No comments:

Post a Comment