Tuesday, September 21, 2010

संयुक्त परिवार

सच पूछो तो जीवन मे बस प्यार ही प्यार था
जब हमारे समाज मे संयुक्त परिवार था
दादा दादी , चाचा चाची,
ताऊ ताई , बहन भाई ,
किसी एक की ख़ुशी मे पूरे परिवार का चेहरा खिलता था
और हर एक बच्चे को कई कई माताओं का प्यार मिलता था
जब घर का कोई सदस्य बीमार हो जाता था
तो पूरा परिवार उसकी सेवा मे लग जाता था
चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ नज़र आती थी
और कोई बच्चा रूठ जाये तो दादी कितने प्यार से मानती थी
बच्चो का लड़ना, झगड़ना, फिर एक थाली मे बैठकर खाना
और बहुओं का बारी बारी से मायके मे जाना
पूरा का पूरा परिवार एक ही छत के नीचे पलता था
हँसते खिलखिलाते कब बड़े हो गए पता ही नहीं चलता था
परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे के लिए जीते थे
एक दूसरे के लिए मरते थे
और व्यक्ति जितना प्यार पत्नी को
उतना ज्यादा माँ बाप को करते थे
लेकिन आज के एकल परिवार मे
पिता रात को काम से आते हैं
और उनके आने से पहले
बच्चे खा पी कर सो जाते हैं
दोपहर मे बच्चे स्कूल से आकर शाम तक
मम्मी के आफ़िस से आने का करते हैं इंतजार
बच्चे नहीं जानते क्या होता है दादा दादी का प्यार
बच्चे नहीं जानते चाचा चाची का दुलार
काश बच्चो को फिर मिल जाये वो मजबूत आधार
काश बच्चो को फिर मिल जाये सयुंक्त परिवार
सयुंक्त परिवार , सयुंक्त परिवार !

14 comments:

  1. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
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  2. बहुत खुब लिखा है आपने

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  3. गुप्ता जी, आज कल तो संयुक्त परिवार देखना भी दूभर हो गया है|

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    1. sach bahut accha hai meri debate mein kam aaya

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  5. "काश बच्चो को फिर मिल जाये वो मजबूत आधार
    काश बच्चो को फिर मिल जाये सयुंक्त परिवार"

    शख्त जरुरत है - सच्ची और बहुत अच्छी सोच - प्रेरक रचना के लिए धन्यवाद्

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  6. सच्ची और बहुत अच्छी सोच - प्रेरक रचना के लिए धन्यवाद्

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  7. सुन्दर अभिव्यक्ति ,शुभ कामनाएं । कुछ हट कर खबरों को पढ़ना चाहें तो जरूर पढ़े - " "खबरों की दुनियाँ"


    "

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  8. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  9. hum to sanyukt parivar me pale bade hue hai aisaa laga sara ateet lakar aapne saamne rakh diyaa.......
    Aabhar

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  10. bakwass tha khud toh tu sanyukt parivar mein rahta nahi aur bada aaya hame sikhane wala chal hat...

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    1. hain sahi kha tumne khud toh kuch karte nahi hume sikhate phirte hain inko toh sabak sikhana hi padega

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  11. befkufffffffffffffffffffffffffffffffff......

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